Friday, 1 February 2013

मुक्तक

थोड़ी सी मौसिकी, थोड़ी सी
शायरी का अहतराम करते हैं,
मगर पूरा शायर बन जाते हैं
जब आपका ख्याल करते हैं।

अमित गुप्ता

Wednesday, 30 January 2013

मुक्तक

जब चेहरे पर
मुस्कराहट आने लगे
और नज़र
खुद से शरमाने लगे
तो समझ लेना
हम पास आने लगे

Monday, 28 January 2013

मुक्तक

तुमसे मुलाकात न होती
अपनी कोई बात न होती,
तो इतनी तनहा अकेली
अपनी रात न होती

अमित गुप्ता  

Friday, 25 January 2013

प्यारा भारत देश

भारत देश हमारा
प्यारा भारत देश
अलग अलग है यहाँ वाणी
अलग अलग हैं इसके वेश

विविध विविध हैं धर्म यहाँ
विविध विविध हैं कर्म यहाँ
भिन्नताओं की भूमि पर
देता एकता का सन्देश
भारत देश हमारा
प्यारा भारत देश

है गौरव गाथा उनकी
मात्रभूमि पर जो वीर हुए
प्राण न्यौछावर करने वाले
संत महात्मा धीर हुए

मात्र भूमि की खातिर
जिन वीरों ने बलिदान किये
उन माताओं को नमन जिन्होंने
लाल अपने कुर्बान किये

इसकी रक्षा कर्तव्य हमारा
यही धर्म और यही उद्देश्य
भारत देश हमारा
प्यारा भारत देश




Wednesday, 23 January 2013

मेरी आँखों के सपने ........

मेरी आँखों के सपने
आ मेरे आँचल में
रखूँ तुझे सीने से लगा,
बरसाऊँ तुझ पर दुलार
गोद में सिर रख सहला,
तुझसे करूँ बातें हज़ार
मेरी आँखों के सपने ........


दुआओं में खुदा से माँगा है तुझे
हर घडी हर पल चाह है तुझे
करूँ हर ख़ुशी तुझ पर निसार
मेरी आँखों के सपने ........


सुबह के सूरज सा,
रात्रि के चाँद सा तू
हर्षित मन आँगन में
छाया उन्माद सा तू
मेरी आँखों के सपने ........


बंद आँखों से पलकों पर उतरा
जगमग नन्हा सा दीप तू
कब से था कल्पनाओं में
अब आया है समीप  तू
मेरी आँखों के सपने ........

Sunday, 23 December 2012

नन्हा - सा अंकुर

नन्हा - सा अंकुर
ले रहा अंगडाई अंतर में
कब कैसे बदल गया
सारा जहां पल भर में,

मन के पावन जल से हो सिंचित
पलकों पर सजी खुशियों से
निखार पायेगा,

आँखों में भरी रौशनी से हो दीप्त
मन में उतर आएगा,

खोलेगा आँखें -
बनकर नन्हा सा फूल,
खुशबू से अपनी -
सारा जहाँ महकाएगा... 

Monday, 10 December 2012

नजदीकियां

याद है पहली बार वो तेरे छूने का एहसास
करीब होकर भी दूर, दूर होकर भी थे पास,

चलते चलते हाथ थाम लिया था
शरमाकर मैंने छुड़ा दिया था,

दूरियां नजदीकियां सहते सहते
न बनता था हाले-दिल भी कहते, 

ज़माने से छुप जब-जब  नज़रें मिलती थीं
साँसों में तरंग, दिल में कलियाँ खिलती थीं,

प्यार- प्यार तो ज़िक्र भर में हो गया तुमसे
प्यार है - तुमने भी कभी नही कहा मुझसे,

आज जुड़ गए एक दूजे से इस कदर
हसीन हो गया है ज़िन्दगी का सफ़र ...